Angarki Chaturthi: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी की तिथि, महत्व और व्रत विधि

Angarki Chaturthi Sankashti Ganesh vrat puja

अंगारकी चतुर्थी वह संकष्टी चतुर्थी है जो मंगलवार के दिन पड़ती है। अगली पक्की अंगारकी चतुर्थी 22 जून 2027 (मंगलवार) को है — कृष्णपिंगल संकष्टी। उज्जैन में चाँद उस दिन रात करीब 9:50–9:55 बजे निकलेगा। इस दिन भगवान गणेश का व्रत रखने से संकट दूर होते हैं, ऐसी परंपरागत मान्यता है।

संकष्टी चतुर्थी हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है और भगवान गणेश को समर्पित है। जब यही तिथि मंगलवार को पड़ जाए तो उसे अंगारकी चतुर्थी (अंगारकी संकष्टी) कहते हैं और इसे सबसे विशेष माना जाता है। इस पोस्ट में अंगारकी चतुर्थी की आगामी तिथियां, महत्व और व्रत की सरल विधि दी गई है।

अंगारकी चतुर्थी — एक नज़र में

  • क्या है: मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी (गणेश व्रत)
  • अगली तिथि: मंगलवार, 22 जून 2027 (कृष्णपिंगल संकष्टी)
  • उसके बाद: मंगलवार, 16 नवंबर 2027
  • व्रत का नियम: सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास, रात में चाँद को अर्घ्य देकर पारण
  • पूजनीय: भगवान गणेश — दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें

अंगारकी चतुर्थी की तिथियां (2026–2027)

तिथिदिनसंकष्टी का नाम
6 जनवरी 2026मंगलवार (बीत चुका)लंबोदर (सकट चौथ)
5 मई 2026मंगलवार (बीत चुका)विकट संकष्टी
29 सितंबर 2026मंगलवार (बीत चुका)वक्रतुंड संकष्टी
22 जून 2027मंगलवार (अगली)कृष्णपिंगल संकष्टी
16 नवंबर 2027मंगलवारसंकष्टी चतुर्थी

एक ज़रूरी बात: फरवरी 2027 की संकष्टी चतुर्थी को लेकर पंचांगों में मतभेद है — कुछ पंचांग 23 फरवरी (मंगलवार) और कुछ 24 फरवरी (बुधवार) बताते हैं, क्योंकि उस दिन तिथि क्षय की स्थिति है। इसलिए उसे पक्की अंगारकी चतुर्थी नहीं माना जा सकता। व्रत से पहले अपने शहर के पंचांग से तिथि और चंद्रोदय का समय अवश्य जांच लें।

अंगारकी चतुर्थी का महत्व

गणेश जी को विघ्नहर्ता — संकट हरने वाला — कहा जाता है, और संकष्टी चतुर्थी का अर्थ ही है “संकट से उबारने वाली चतुर्थी”। मान्यता है कि मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी का व्रत साधारण संकष्टी से कहीं अधिक फलदायी होता है। यह दिन गणेश उपासना, मोदक का भोग और दूर्वा अर्पित करने का है। मंगलवार हनुमान जी का भी दिन है, इसलिए कई लोग इस दिन हनुमान उपासना भी जोड़ते हैं — मंगल से जुड़े उपायों के बारे में मंगल दोष के परंपरागत उपाय पढ़ें।

अंगारकी चतुर्थी व्रत की सरल विधि

  1. सुबह: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प लें। दिन भर उपवास रहता है (फलाहार ले सकते हैं)।
  2. पूजा की सामग्री: दूर्वा (हरी घास), लाल पुष्प, मोदक या लड्डू, दूर्वा-माला, रोली, चंदन, दीया।
  3. संध्या पूजा: शाम को गणेश जी की पूजा करें — दूर्वा और लाल पुष्प अर्पित करें, मोदक का भोग लगाएं, गणेश अथर्वशीर्ष या “संकटनाशन गणेश स्तोत्र” का पाठ करें।
  4. चंद्र पूजन और पारण: रात में चाँद निकलने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें (अंगारकी के दिन उज्जैन में चाँद देर से निकलता है — करीब 9:50 बजे के बाद)। इसके बाद व्रत खोलें और प्रसाद बांटें।

चाँद देखकर व्रत खोलने वाले दूसरे बड़े व्रत के बारे में करवा चौथ 2026: पूजा मुहूर्त और चाँद का समय भी पढ़ें।

उज्जैन में गणेश पूजा के लिए संपर्क करें

अंगारकी चतुर्थी की पूजा, गणेश अथर्वशीर्ष पाठ या उज्जैन में किसी भी पूजा-अनुष्ठान के लिए ज्योतिषाचार्य विजय जोशी से संपर्क करें। उज्जैन की पूजाओं के बारे में उज्जैन में मंगल दोष और काल सर्प पूजा का महत्व भी पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अंगारकी चतुर्थी क्या होती है?

हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का गणेश व्रत होता है। जब यह तिथि मंगलवार को पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं और इसे सबसे शुभ संकष्टी माना जाता है।

अगली अंगारकी चतुर्थी कब है?

अगली पक्की अंगारकी चतुर्थी मंगलवार, 22 जून 2027 को है (कृष्णपिंगल संकष्टी)। फरवरी 2027 की संकष्टी को लेकर पंचांगों में मतभेद है, इसलिए उसे पक्का नहीं माना जा सकता।

अंगारकी चतुर्थी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह उपवास का व्रत है — फलाहार (फल, मखाना, दूध आदि) लिया जा सकता है। कुछ लोग निर्जला भी रखते हैं। व्रत रात में चाँद को अर्घ्य देकर ही खुलता है।

चाँद देर से निकले तो क्या करें?

संकष्टी का पारण चंद्रोदय के बाद ही होता है, भले चाँद देर से निकले। पंचांग के चंद्रोदय समय पर अर्घ्य दें; बादल हों तो चाँद की दिशा में अर्घ्य देकर विधि पूरी की जा सकती है।

संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी में क्या अंतर है?

संकष्टी चतुर्थी हर माह आती है। वही तिथि जब मंगलवार को पड़े तो अंगारकी चतुर्थी कहलाती है। मंगलवार की विशेषता जुड़ने से इसे अधिक फलदायी माना जाता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *