Vijay Joshi

बुध केतु जड़त्व दोष — भ्रमित मन, बुध और केतु ग्रह, तथा शांति के दीये का प्रतीक चित्र

बुध केतु जड़त्व दोष: लक्षण, कारण और शांति उपाय — उज्जैन

सौरभ इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में था। पढ़ाई में होशियार था, पर कैंपस प्लेसमेंट के दिन उसका मन अजीब ढंग से डोल गया। एक ही प्रश्न के दो उत्तर दिमाग़ में उलझे रहे, और उसने वह चुनाव किया जिसका उसे तुरंत बाद पछतावा हुआ। घर लौटकर मां से बोला, “समझ नहीं आता, निर्णय लेते वक्त

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बुध राहु जड़त्व दोष लक्षण प्रभाव उपाय — पंडित विजय जोशी

जड़त्व दोष क्या है? बुध-राहु युति के लक्षण, प्रभाव और शांति उपाय

कड़ी मेहनत करने के बाद भी नतीजा उम्मीद से कम मिले, पढ़ा हुआ परीक्षा में याद न आए, और सही समय पर सही फैसला न ले पाएं — तो अक्सर लोग इसे “किस्मत” कहकर टाल देते हैं। लेकिन वैदिक ज्योतिष में इसके पीछे एक स्पष्ट कारण हो सकता है: जन्म कुंडली में बुध और राहु

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Can a Manglik Marry a Non-Manglik? The Complete, Honest Guide

Yes, a Manglik can marry a non-Manglik. In fact, classical Vedic astrology itself — the very tradition that created the concept of Mangal Dosha — describes many cancellation conditions under which the dosha is traditionally considered to weaken significantly or become neutralised. The idea that “a Manglik must only marry a Manglik” is widely regarded

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उज्जैन के पारदेश्वर और अंगारेश्वर महादेव में क्यों कराएं रुद्राभिषेक, कालसर्प व मंगल दोष पूजा? जानें पौराणिक रहस्य

उज्जैन (अवंतिका नगरी) को वैदिक काल से ही संपूर्ण ब्रह्मांड की काल-गणना का केंद्र और पृथ्वी का नाभि-स्थान माना गया है। कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के ठीक ऊपर स्थित होने के कारण इस भूमि पर ग्रहों और नक्षत्रों की ऊर्जा अत्यंत प्रभावशाली होती है। यही कारण है कि ज्योतिष शास्त्र में जन्मकुंडली के गंभीर

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अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में मंगल दोष पूजा: विधि एवं महत्व

हिंदू ज्योतिष शास्त्र में मंगल को “क्रूर ग्रह” का नाम दिया गया है, परंतु यही मंगल साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त, ऊर्जा और युद्ध कौशल का प्रतीक भी है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो — विशेषकर लग्न, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में — तो उसे “मंगल

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सिंहस्थ उज्जैन 2028: तिथि, महत्व, अनुष्ठान की पूरी जानकारी

सिंहस्थ (Simhasth) भारत का सबसे विशाल, आध्यात्मिक और पवित्र कुंभ पर्व है, जो हर 12 वर्ष में उज्जैन में आयोजित होता है। यह वह अद्भुत समय होता है जब करोड़ों साधु-संत, अखाड़े, भक्त, महापुरुष और लाखों श्रद्धालु शिप्रा नदी के तट पर एकत्रित होते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है।

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जाने शनि की दृष्टि का भिन्न भावो में क्या प्रभाव होता है?

ज्योतिष में शनि की दृष्टि का प्रभाव| Saturn Aspects in Astrology वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह (Saturn) को न्याय के देवता और कर्मफल दाता माना गया है। शनि व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे सुख और दुख दोनों ही प्रदान करते हैं। अक्सर लोग शनि को केवल कष्ट देने वाला मानते हैं, लेकिन वास्तव में

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मंगल का धनु राशि में प्रवेश – ऊर्जा, परिवर्तन और उपाय

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, पराक्रम, क्रोध और कर्म का प्रतीक माना गया है। जब मंगल किसी नई राशि में प्रवेश करता है, तो यह घटना जीवन के हर क्षेत्र — करियर, स्वास्थ्य, संबंधों और निर्णयों पर प्रभाव डालती है। जब मंगल वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करता है,

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शनि अमावस्या: शनि पूजा और श्रापित दोष शांति का उपाय

जब अमावस्या तिथि शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनि अमावस्या (Shani Amavasya) कहा जाता है। यह एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। शनि अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन परिवर्तन का अवसर है। इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करने से व्यक्ति के पुराने पाप, बुरे कर्म और ग्रहबाधाएँ

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मंगल प्रदोष व्रत: शिव कृपा और मंगल बल का विशेष संगम

मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन मंगलवार के प्रदोष काल में मंगल प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। मंगलवार का मंगल प्रदोष व्रत शिव कृपा और मंगल ग्रह की ऊर्जा का अद्भुत संगम माना जाता है। जो भी व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखता है, ऐसी

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