9 फरवरी 2026, सोमवार को फाल्गुन मास की कृष्ण अष्टमी यानी कालाष्टमी आएगी। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की विशेष पूजा के लिए जाना जाता है, जो समय के स्वामी हैं और हर तरह के भय, शत्रु, तंत्र-मंत्र बाधा तथा जीवन की रुकावटों को दूर करते हैं। इस बार सोमवार होने से यह और भी शुभ है, क्योंकि सोमवार शिव का प्रिय दिन है।
कालाष्टमी वह दिव्य अवसर है जब भैरव बाबा सीधे अपनी कृपा बरसाते हैं। भय और बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं तो इस दिन व्रत और पूजा जरूर करें। उज्जैन के अनुभवी पंडित विजय जोशी जी पूजा-अनुष्ठान में कई वर्षो का अनुभव रखते है तो आज ही अपनी पूजा को सफल बनाएँ और इस पूजा को उज्जैन में सम्पन्न कराएँ।
9 फ़रवरी को कालाष्टमी का महत्व क्या है?
9 फरवरी 2026 कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। कालाष्टमी प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है और यह भगवान काल भैरव को समर्पित होती है। काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है, जो भक्तों को अकाल मृत्यु, भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं।
ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में कालाष्टमी को अत्यंत प्रभावशाली तिथि माना गया है, विशेषकर जब जीवन में बार-बार अकारण संकट, डर या रुकावटें आ रही हों।
काल भैरव जी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है?
भगवान काल भैरव को “काशी के कोतवाल” कहा जाता है। मान्यता है कि:
- इनके बिना काशी में कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता
- ये समय और कर्म के दंडाधिकारी हैं
- अन्याय करने वालों को दंड और भक्तों को संरक्षण देते हैं
काल भैरव की उपासना व्यक्ति को निर्भय, आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाती है।
कालाष्टमी और अष्टमी तिथि का संबंध क्या है?
अष्टमी तिथि शक्ति, सुरक्षा और उग्र ऊर्जा की प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण काल भैरव की पूजा अष्टमी को विशेष फल देती है।
कालाष्टमी पर की गई साधना से:
- नकारात्मक शक्तियाँ शांत होती हैं
- राहु-केतु और शनि दोष का प्रभाव कम होता है
- तंत्र-मंत्र और नजर दोष से रक्षा मिलती है
9 फ़रवरी कालाष्टमी पूजा विधि क्या है?
कालाष्टमी की पूजा विधि सरल है, लेकिन श्रद्धा और नियम आवश्यक हैं।
प्रातःकाल
- सूर्योदय से पहले स्नान करें
- स्वच्छ या काले वस्त्र धारण करें
- व्रत का संकल्प लें
संध्या या रात्रि पूजा
- काल भैरव जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- सरसों के तेल का दीपक जलाएँ
- काले तिल, उड़द, नारियल अर्पित करें
- भैरव जी को प्रिय भोग अर्पित करें (परंपरा अनुसार)
मंत्र जाप
“ॐ कालभैरवाय नमः” – 108 बार
या
“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा”
कालाष्टमी व्रत के प्रमुख लाभ क्या है?
9 फ़रवरी कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से निम्न लाभ प्रदान करता है:
- अकारण भय और मानसिक तनाव से मुक्ति
- शत्रुओं और विरोधियों पर विजय
- तंत्र-बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
- कोर्ट-कचहरी और विवादों में राहत
- अचानक होने वाले नुकसान से बचाव
किन लोगों के लिए कालाष्टमी व्रत विशेष लाभकारी है?
यह व्रत विशेष रूप से इनके लिए अत्यंत शुभ माना जाता है:
- जिन्हें बार-बार बुरे सपने आते हों
- जिनका आत्मविश्वास कमजोर हो
- जिनकी कुंडली में राहु-केतु या शनि बाधा हो
- जिनके कार्य बनते-बनते बिगड़ जाते हों
- जो अदृश्य भय या असुरक्षा महसूस करते हों
कालाष्टमी के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय कौन-कौन से है?
कालाष्टमी पर ये उपाय करने से शीघ्र सकारात्मक परिणाम मिलते हैं:
- काले कुत्ते को रोटी या दूध खिलाना
- 8 सरसों के तेल के दीपक जलाना
- भैरव चालीसा या काल भैरव अष्टक का पाठ
- काले तिल और उड़द का दान
- मद्य, मांस और तामसिक भोजन से परहेज
उज्जैन और काशी में काल भैरव पूजा का विशेष महत्व क्या है?
उज्जैन का काल भैरव मंदिर और काशी का काल भैरव मंदिर कालाष्टमी पर विशेष फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि:
- यहाँ की गई पूजा शीघ्र फल देती है
- नकारात्मक दोष जल्दी शांत होते हैं
- साधक को सुरक्षा कवच प्राप्त होता है
इसी कारण देश-विदेश से भक्त कालाष्टमी पर यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
9 फ़रवरी कालाष्टमी भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अवसर है। सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई काल भैरव पूजा जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और आत्मबल प्रदान करती है।
यदि आप लंबे समय से डर, बाधा, शत्रु समस्या या अदृश्य नकारात्मक प्रभावों से परेशान हैं, तो इस कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की आराधना अवश्य करें।