6 फ़रवरी 2026: संकट चतुर्थी व्रत, पूजा विधि, लाभ और उपाय

6 फरवरी 2026, शुक्रवार को फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी पड़ रही है, जो संकष्ट चतुर्थी (संकट चतुर्थी) के नाम से जानी जाती है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जो सभी संकटों का नाश करते हैं। इस बार की संकष्ट चतुर्थी विशेष है क्योंकि चतुर्थी तिथि 5 फरवरी रात से 6 फरवरी दोपहर तक रहेगी, और चंद्रोदय के साथ व्रत पूरा होगा।

संकट चतुर्थी जीवन की परेशानियों को दूर करने का एक दिव्य अवसर है। सच्चे मन से किया गया व्रत और गणेश जी की आराधना न केवल बाहरी संकटों को दूर करती है, बल्कि भीतर की नकारात्मकता को भी समाप्त करती है। यदि आप इस व्रत और पूजा के बारें में सटीक व पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो अभी उज्जैन के अनुभवी पंडित विजय जोशी जी से नीचे दिये गए नंबर द्वारा संपर्क करें और जानकारी प्राप्त करें।

6 फ़रवरी को संकट चतुर्थी क्यों विशेष है?

6 फ़रवरी 2026 को संकट चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। यह तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित होती है। संकट चतुर्थी का अर्थ ही है – संकटों को हरने वाली चतुर्थी। इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ, आर्थिक परेशानियाँ, स्वास्थ्य समस्याएँ और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में यह व्रत विशेष रूप से चंद्र दोष, मानसिक अशांति और अचानक आने वाले कष्टों को शांत करने वाला माना गया है।

संकट चतुर्थी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व क्या है?

संकट चतुर्थी का संबंध सीधे चंद्रमा और मन से होता है। चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं, जो:

  • विघ्नों का नाश करते हैं
  • बुद्धि और विवेक प्रदान करते हैं
  • कार्यों में सफलता दिलाते हैं

जो जातक इस दिन उपवास रखकर चंद्र दर्शन के बाद पूजा करते हैं, उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संकट चतुर्थी व्रत कथा क्या है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार चंद्र देव ने गणेश जी का उपहास किया, जिससे क्रोधित होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दे दिया। बाद में चंद्र देव के प्रायश्चित पर गणेश जी ने कहा कि जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन व्रत रखकर चंद्र दर्शन के बाद मेरी पूजा करेगा, उसे जीवन के संकटों से मुक्ति मिलेगी।

इसी कारण संकट चतुर्थी पर चंद्र दर्शन के बाद ही पारण किया जाता है।

संकट चतुर्थी पूजा विधि क्या है?

संकट चतुर्थी की पूजा विधि सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली है:

प्रातःकाल

  • स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें
  • व्रत का संकल्प लें

संध्या काल

  • गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
  • दूर्वा, लाल फूल, मोदक अर्पित करें
  • दीपक और धूप जलाएँ
  • गणेश मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ करें

चंद्र दर्शन

  • चंद्रमा को अर्घ्य दें
  • गणेश जी की आरती करें
  • इसके बाद ही व्रत का पारण करें

संकट चतुर्थी व्रत के प्रमुख लाभ कौन-कौन से है?

6 फ़रवरी को किया गया संकट चतुर्थी व्रत विशेष फल प्रदान करता है:

  • जीवन के अचानक आने वाले संकट दूर होते हैं
  • नौकरी और व्यवसाय में आ रही बाधाएँ हटती हैं
  • मानसिक तनाव और भय में कमी आती है
  • विवाह और संतान से जुड़ी परेशानियाँ कम होती हैं
  • धन हानि और ऋण समस्या में राहत मिलती है

किन लोगों के लिए संकट चतुर्थी व्रत विशेष लाभकारी है?

यह व्रत विशेष रूप से इनके लिए अत्यंत शुभ माना जाता है:

  • जिनकी कुंडली में चंद्र दोष हो
  • बार-बार कार्यों में विघ्न आ रहा हो
  • व्यापार में नुकसान या रुकावट चल रही हो
  • स्वास्थ्य बार-बार बिगड़ता हो
  • मानसिक अशांति या डर बना रहता हो

संकट चतुर्थी के प्रभावी उपाय कौन-कौन से है?

यदि आप व्रत के साथ ये उपाय करें तो लाभ और बढ़ जाता है:

  • गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें
  • “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
  • चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें
  • गरीब या जरूरतमंद को भोजन दान करें
  • बुधवार या चतुर्थी को गणेश मंदिर दर्शन करें

ज्योतिषीय दृष्टि से संकट चतुर्थी का महत्व क्या है?

ज्योतिष में चतुर्थी तिथि मन, माता और सुखों से जुड़ी होती है। संकट चतुर्थी पर गणेश पूजा:

  • मन को स्थिर करती है
  • नकारात्मक ग्रह प्रभावों को शांत करती है
  • निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है।

यदि आप लंबे समय से किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो इस संकट चतुर्थी पर गणपति बप्पा की शरण में जाना आपके जीवन में नया प्रकाश ला सकता है।

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